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CBSE के सभी स्कूलों में भारतीय भाषाओं में पढ़ाया जाएगा पाठ्यक्रम, जानें अपडेट…

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CBSE के सभी स्कूलों में भारतीय भाषाओं में पढ़ाया जाएगा पाठ्यक्रम, जानें अपडेट…

CBSE  ने स्कूलों और सिलेबस के लिए बड़ा फैसला लिया है। CBSE बोर्ड की मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों में कक्षा 12वीं तक भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। बताया जा रहा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट कर दी जानकारी। वहीं सीबीएसई के इस फैसले का उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने स्वागत किया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, स्कूल में पढ़ाई जाने वाली NCERT की किताबें भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होंगी। अभी तक इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई करवाई जाती थी। लेकिन अब बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। जिसके मुताबिक संबद्ध स्कूलों को पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12वीं तक शिक्षा के वैकल्पिक माध्यम के रूप में मातृभाषा का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।

बोर्ड की तरफ से 21 जुलाई के जारी एक नोटिस में कहा गया है कि, “…सीबीएसई से संबद्ध स्कूल भारतीय संविधान की अनुसूची 8 में उल्लिखित भारतीय भाषाओं का उपयोग मूलभूत चरण से लेकर माध्यमिक चरण के अंत तक यानी पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं से लेकर बारहवीं कक्षा तक वैकल्पिक माध्यम के रूप में अन्य मौजूद विकल्पों के रूप में करने पर विचार कर सकते हैं।”

स्कूलो में बच्चों की पढ़ाई मातृभाषा में हो सके इसके लिए कुशल शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों और समय की उपलब्धता जैसी बहुभाषी शिक्षा को लागू करने की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने स्कूलों से उपलब्ध संसाधनों का पता लगाने, विशेषज्ञों से परामर्श करने आदि को भी कहा है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने ट्वीट में कहा कि अपने सभी विद्यालयों में बाल वाटिका से कक्षा 12वीं तक भारतीय भाषाओं में शिक्षा का विकल्प उपलब्ध कराने के लिए सीबीएसई को बधाई देता हूँ। NEP की परिकल्पना के अनुरूप यह विद्यालयों में भारतीय भाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देगा शिक्षा में बेहतर outcomes की दिशा में यह एक अच्छी शुरुआत है।

वहीं उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने ट्वीट कर लिखा ‘केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में यह निश्चित ही ‘शिक्षा क्षेत्र में एक नए युग’ की शुरुआत है। धन सिंह रावत ने लिखा ‘इस सराहनीय कदम के लिए सीबीएसई को बधाई देता हूं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की परिकल्पना के अनुरूप, इससे बच्चों को भारतीय भाषा आधारित शिक्षा ग्रहण करने का अवसर प्राप्त होगा।

 

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